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New Height of Mount Everest ( माउंट एवरेस्ट की नई ऊंचाई )

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New Height of Mount Everest ( माउंट एवरेस्ट की नई ऊंचाई ) नेपाल और चीन के संयुक्त सर्वे में  दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की नई ऊंचाई का पता चला है। भारत द्वारा 1954 में बताई गई ऊंचाई 8,848 मीटर से यह 86 सेंटीमीटर ज्यादा है। 2015 में भयानक भूकंप सहित अन्य कारणों से इसकी ऊंचाई में बदलाव की चर्चा के बीच नेपाल सरकार ने इस चोटी की सटीक ऊंचाई मापने का फैसला किया था।  नेपाल और चीन ने मंगलवार को संयुक्त रूप से घोषणा की कि माउंट एवरेस्ट की नई ऊंचाई 8,848.86 मीटर है। काठमांडो में विदेशमंत्री प्रदीप ग्यावली ने इसकी घोषणा की। चीन ने 2005 में ऊंचाई 8844.43 मीटर बताई थी।  पहले दो बार चीन इसकी अलग - अलग ऊंचाई बता चुका है।  शी जिनपिंग का मुख्य एजेंडा था....    पिछले साल जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेपाल यात्रा पर आए, तो एवरेस्ट को संयुक्त रूप से मापने पर सहमति बनाना उनका प्रमुख एजेंडा था। तब पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया था कि चीन अपनी तरफ से भी यह काम कर सकता था। उसने 2018 में इसकी शुरुआत भी कर दी थी। चूँकि यह चोटी नेपाल में पड़ती है, इसलिए चीन के माप को ...

पंजाब का मैदान

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पंजाब का मैदान 
(The Punjab Plains)



यह मैदान भारत के विशाल मैदान का एक विशिष्ट खण्ड है। यह 27° 39' से 32° 31' उत्तरी अक्षांश और 73° 31' पू० से 77° 36' पूर्वी देशान्तर के बीच फैला है। इस प्रदेश कुल क्षेत्रफल 96171 वर्ग किमी० है। इसमें पंजाब , हरियाणा व केंद्र- शासित प्रदेश दिल्ली व चण्डीगढ शामिल हैं। इसकी पूर्वी सीमा यमुना नदी द्वारा बनती है। पश्चिमी सीमा राजनीतिक सीमा है। उत्तर में शिवालिक पहाड़ियों ने इसे अलग कर दिया है। दक्षिण में राजस्थान से इसकी सीमा बनती हैं। इस मैदान का अधिकांश भाग सतलज और यमुना के मध्य स्थित है , जो गंगा व सिंधु नदियों के जल प्रवाहों के बीच एक विभाजक का काम करता है। प्रशासनिक दृष्टि से सुविधाजनक होने के कारण दिल्ली राज्य के शाहदरा पट्टी को , जो यमुना के पूर्व में स्थित है , इस मैदान में शामिल कर लिया गया है। 



ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
        विभाजन से पूर्व पंजाब मैदान के अंतर्गत पाकिस्तान का पंजाब व भारत का पंजाब मैदान दोनों ही इस मैदान का अंग थे, लेकिन विभाजन के बाद दोनों प्रदेश आर्थिक, सांस्कृतिक व राजनीतिक दृष्टि से अलग प्रदेश बन गए। सांस्कृतिक दृष्टि से यह मैदान उतना ही पुराना है जितना मानव का इतिहास। सिंधु घाटी सभ्यता का जन्म इसी मैदान में हुआ। रोपड़ उस समय का विकसित नगर था। महाभारत का युद्ध भी यहाँ पर लड़ा गया था। आर्य जाति के लोग यही पर आकर बसे थे। सामजिक ,आर्थिक व राजनीतिक  दृष्टि से इस मैदान का महत्व काफी अधिक है। 

भौतिक परिवेश (Physical Aspects)
         
        चट्टान एवं संरचना (Rocks & Structure) - इस मैदान का अधिकांश भाग नवीन निक्षेपों से ढका है। उत्तर में शिवालिक प्रमुख रूप से टर्शियरी अवसादी नदी निक्षेपों द्वारा निर्मित है। दक्षिणी भाग में अरावली की दिल्ली पहाड़ियां निचली कुडप्पा क्रम की चट्टानों से सम्बंधित हैं। शिवालिक पहाड़ियों में बलुआ पत्थर , चिकनी मिट्टी, कंकड़ व शिलायुक्त चट्टानें मिलती हैं। 

       उच्चावच एवं जलप्रवाह (Relief and Drainage) - यह मैदान अपने उत्तरी भाग के अलावा एक पूर्णतया समतल मैदान के रूप में है। यह समुद्र धरातल से 183 से 426  मीटर के बीच ऊँचाई रखता है। इसका ढाल दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण पूर्व की ओर है। अरावली पहाड़ियों के निकट ढाल उत्तर की ओर है। धरातल की दृष्टि से यह प्रदेश विविधता रखता है। सतलज व यमुना नदियों के निकट खादर प्रदेश मिलता है। यमुना का खादर क्षेत्र उसके वर्तमान प्रवाह और पुराने प्रवाह के बीच विस्तृत मिलता है। यमुना खादर अपने उतारी भाग की अपेक्षा दक्षिणी भाग में अधिक चौड़ाई रखता है। सतलज नदी का खादर क्षेत्र उसके बाएं किनारे पर औसत रूप से 10 किमी० की चौड़ाई रखता है। कहीं-कहीं इसकी चौड़ाई 20 किमी० तक है। मैदान के  दक्षिण में रेतीले प्रदेश की प्रमुखता है। हिसार जिले के दक्षिण का अधिकांश भाग रेतीले टीलों से प्रभावित रहता। है भूमिगत जल का तल दक्षिण से उत्तर व पूर्व के ओर ऊँचा हो जाता है। अनेक बरसाती नदियों का जन्म शिवालिक पहाड़ियों से हुआ है, जो स्थानीय भाषा में 'चो' रेतीली नदियां कहलाती हैं। वास्तव में यह मैदान अपने ऊपरी भाग में भूमि कटाव से बुरी तरह पीड़ित है। हैमिल्टन (A.P. Hamilton) के अनुसार यह मैदान भू-कटाव की दृष्टि से इसका स्थान यमुना-चम्बल प्रदेश के बाद आता है। 





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