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नागार्जुन-सागर परियोजना
(Nagarjuna-Sagar Project)
प्रायद्वीपीय भारत की यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण नदी घाटी परियोजना है जो कृष्णा नदी के ऊपर क्रियान्वित की गई है। कृष्णा नदी महाराष्ट्र राज्य में सह्याद्री की पहाड़ियों के पूर्वी ढालो से महाबलेश्वर के उत्तर से निकलकर महाराष्ट्र ,कर्णाटक तथा आंध्र प्रदेश राज्यों में प्रवाहित होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसका परवाह क्षेत्र लगभग 26 लाख वर्ग किमी० में फैला हुआ है। इनसे उत्पन्न होने वाली विभिन्न समस्याओं को देखते हुए सन 1955-56 में इस नदी पर उपरोक्त परियोजना क्रियान्वित की गयी। इस परियोजना के निम्नलिखित उद्देश्य है -
(१) कृष्णा नदी पर नागार्जुन सागर बांध बनाकर इसकी बाढ़ पर नियंत्रण करना।
(२) सिंचाई हेतु सुविधाएं विकसित करना।
(३) जल विद्दुत का उत्पादन करना।
(४) मछली पालन उद्दोग एवं पर्यटन क्षेत्रों का विकास करना।
परियोजना का प्रारूप
(Plan Of the Project)
(1) नागार्जुन सागर बाँध - इस परियोजना के अंतर्गत कृष्णा नदी पर आंध्र प्रदेश के नलगोंडा जिले में हैदराबाद से लगभग 144 किमी० दक्षिण-पूर्व में नन्दीकोडा गाँव के निकट 15 किमी० लम्बा तथा 10 मीटर ऊंचा नागार्जुन सागर बांध बनाया गया है। बांध द्वारा निर्मित जलाशय में 808 करोड़ घन मीटर जल एकत्र किया जा सकता है। बांध के दोनों ओर लगभग 3.5 किमी० लम्बी मिट्टी की पुश्तीनुमा अवरोधक दीवारें भी बनाई गयी है।
(2) नहरें (Canals) - बांध के दोनों किनारो से दो नहरें निकाली गयी हैं। दाहिने किनारे से निकली गयी जवाहर नहर की लम्बाई 22.5 किमी० है तथा इसमें 1500 घन मीटर जल प्रति सेकेण्ड की गति से प्रवाहित होता है। इस नहर द्वारा गुन्टूर, प्रकासम तथा नेल्लूर जिलों की लगभग 4 लाख हैक्टेयर भूमि को सिंचाई की जाती है। बाँध के बाएं किनारे से 178 किमी० लम्बी लालबहादुर शास्त्री नहर निकली गयी जिससे नलगोन्डा, खम्माम, कृष्णा और पश्चिम कावेरी जिलों की लगभग 3 लाख हैक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव हो सकी है। वैसे इस परियोजना के अंतर्गत निकाली जाने वाली नहरों से कुल 8.3 लाख हैक्टेयर भूमि की सिंचाई सुविधाएं उपब्ध करने का प्रावधान रखा गया है।
(3) विद्दुत शक्ति गृह (Power House) - सन 1970 में बांध के निकट एक विद्दुत गृह स्थापित किया गया है जिसमें 50 मेगवाट प्रति इकाई की उत्पादन क्षमता वाली दो इकाइयां लगाई गयी हैं। यहां उत्पन्न होने वाली विद्दुत शक्ति नलगोण्डा, महबूबनगर, हैदराबाद आदि नगरों में विभिन्न उद्दोग-धंधों एवं प्रकाश हेतु उपयोग में लायी जाती है। इस सम्पूर्ण परियोजना पर 163 करोड़ रूपए के परिव्यय का अनुमान है। इस परियोजना के अंतर्गत उपरोक्त निर्माण कार्यों के अतिरिक्त कृष्णा नदी के जल को संतुलित काने हेतु इस पर विजयवाड़ा के प्रकासम अवरोधक बाँध बनाया गया है तथा बांध दोनों किनारों से डेल्टाई प्रदेशों में सिंचाई नहरें निकली गयी हैं। इस परियोजना की क्रियान्वयन से आंध्र प्रदेश में घाटीवर्ती क्षेत्रो में सुख-समृद्धि का वातावरण पैदा हुआ है।
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