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कोसी परियोजना
(Kosi Project)

कोसी नदी अपने मार्ग परिवर्तन तथा विनाशकारी बाढ़ों के लिए कुख्यात कही जाती है। विगत दो सौ वर्षों में यह नदी लगभग 125 किमी० पश्चिम की ओर हट चुकी है। इस नदी का उद्गम बिहार के उत्तर में लगभग 40 किमी दूर तिब्बत के पठार से 5500 मीटर की ऊंचाई से होता है जहां से निकलकर यह बृहत हिमालय क्षेत्र में कई तंग घाटियों से होकर तिब्बत तथा नेपाल में प्रवाहित होती हुई बिहार राज्य में प्रवेश करती है तथा इस राज्य में 260 किमी० की यात्रा तय करके गंगा नदी में मिल जाती है। वर्षा ऋतु में तो इस नदी का जल कहीं-कहीं 32 किमी० चौड़ाई में फ़ैल जाता है जिससे बिहार राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 3000 से 5000 वर्ग किमी क्षेत्र जलप्लावित हो जाता है जिसके फलस्वरूप यह क्षेत्र मलेरिया आदि बीमारियों के प्रकोप से ग्रस्त हो जाते है। इस नदी का पानी कभी कभी 24 घंटे में 1 मीटर बढ़ जाता। है, जिससे गाँव के गाँव जलमग्न हो जाते है।
अतः इस विनाशकारी प्रक्रिया को रोकने के लिए कोसी नदी पर एक परियोजना का निर्माण किया गया है। इस परियोजना के निम्नलिखित उद्देश्य हैं -
(१) कोसी नदी की बाढ़ को नियंत्रित करना
(२) नहरों का निर्माण कर नदी के अतिरिक्त जल को सिंचाई हेतु प्रयोग में लाना ,
(३) जल विद्दुत का उत्पादन करना
(४) भूमि कटाव पर रोक लगाना
(५) मत्स्य उद्दोग व जल मार्गो का विकास करना
(६) मलेरिया तथा अन्य बिमारियों पर नियंत्रण करना।
परियोजना का प्रारूप
(Plan of the Project)
इस परियोजना के अंतर्गत 86 करोड़ रूपए की लागत से निम्नलिखित निर्माण कार्य किये गए है --
(1) हनुमान नगर अवरोधक बांध (Hanuman Nagar Barrage) - यह बांध कोसी नदी के आर-पार नेपाल में हनुमान नगर से लगभग 5 किमी० ऊपर बनाया गया है। सीमेंट तथा कंकरीट से बना हुआ यह बांध 1.2 किमी० लम्बा तथा 72 मीटर ऊंचा है। इससे निर्मित जलाशय में 3.1 लाख घन मीटर जल एकत्र किया जा सकता है। इस बांध के पूर्वी किनारे से पूर्वी कोसी नहर निकली गयी है।
(2) पुश्ते बांध (Embankment) - हनुमान बांध के दाहिने एवं बायीं ओर बाढ़ रोकने के लिए 2.42 किमी० तथा 2.00 किमी० लम्बे दो मिट्टी के बांध बनाए गए हैं जिनसे नेपाल एवं बिहार की लगभग 3 लाख हैक्टेयर भूमि जलमग्न होने से बच सकी है। बिहार के मैदानी भाग में नदी के परवाह मार्ग को स्थिर करने के लिए नदी के दोनों ओर मिट्टी के तटबन्ध बनाये गए है।
(3) नहरें (Canals) - परियोजना के अंतर्गत निम्नलिखित नहरों का निर्माण किया गया है -
(१) पूर्वी कोसी नहर (East Kosi Canal) - यह नहर हनुमान जलाशय के बाएं किनारे से निकली गयी है। इस नहर की प्रधान शाखा की लम्बाई 44 किमी० है। मुरलीगंज (64 किमी०), बानकी नगर (82 किमी०), पूर्णिया (64 किमी०), तथा अररिया (58 किमी०) इसकी चार शाखाएँ है जिनसे लगभग 2725 किमी० शाखाओं एवं उपशाखाओं सहित इस नहर की कुल लम्बाई 3040 किमी० है।
(२) पश्चिमी कोसी नहर (West Kosi Canal) - यह हनुमान नगर अवरोधक बांध के दाहिने किनारे से निकली गयी है। यह लगभग 115 किमी० लम्बी है तथा इसके बिहार के दरभंगा जिले की 3 लाख हैक्टेयर तथा नेपाल के सप्तारी जिले की लगभग 12 हजार हैक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव हो सकी है। इस नहर के निर्माण पर 20 करोड़ रूपए व्यय होने का अनुमान है।
(३) राजपुर नहर (Rajpur Canal) - पूर्वी कोसी नहर को और अधिक विस्तृत किया गया है। राजपुर नहर के रूप में शाखाओं सहित कुल लम्बाई 366 किमी० है। इससे मुंगेर तथा सहरसा जिलों की लगभग 1.60 लाख हैक्टेयर भूमि को सिंचाई प्राप्त होती है। इसके निर्माण में 7 करोड़ रूपए व्यय होने का अनुमान है।
(३) विद्दुत शक्ति गृह (Power House) - पूर्वी कोसी नहर पर कटैया नमक स्थान पर 6 करोड़ रूपए की लागत से एक जल विद्दुत गृह स्थापित किया गया है जिसकी उत्पादन क्षमता 20 मेगावाट है। यहां से उत्पन्न होने वाली जल-विद्दुत का आधा भाग बिहार एवं नेपाल को उपलब्ध होता है। विद्दुत शक्ति का उपयोग चीनी , आटा पिसाई, जूट , चावल , दाल आदि उद्दोगों में किया जाता है।
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